Sunday, October 28, 2012

एक साथ छूटा , एक नया साथ मिला



करीबन 11 साल पहले मुझे एक साथी मिली थी , मेरी डायरी .. । तमाम पन्नों पे उसके ,मैंने अपनी ज़िन्दगी जिल्दबंद की थी । पता नहीं चला कब वो मुझसे इतना दूर हो गई थी  .. और पता कब चला ? जब फिर से एक बेचैनी ने मुझे घेर लिया था , और बहुत कुछ मुझमे ही दफ़न हो चुका था।

उस से बहुत किस्से कहे और सुने थे मैंने .. कुछ खुशियाँ कुछ ग़म भी बांटे थे ,न जाने उसका साथ कब छूटा , 
वो डायरी जो अपने पन्नों पे मेरे इतने किस्सों को संभाले रखती थी .. अब कुछ दूरियां सी बन गयी थी हमारे बीच .. 

इसी दौरान ये ब्लॉग का नया माध्यम मिला है .. देखें इसका मेरा साथ कब तक रहता है .. 

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