परुष्णि
Wednesday, December 19, 2012
खून ? किसका ?
एक तस्वीर पे कुछ खरोचें थीं।।
छू के देखा तो ,खून सा बहता था कुछ।।
तमाम मरहम पट्टी करके जब घर लौटा ,
तो मालूम हुआ अपनी ही उंगली कटी थी।
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