Sunday, January 6, 2013

बहुत सहेजो तो कुछ यादें खो ही जाती हैं .. .


आज फिर उस अलमारी को सहेजना चाहा ..

दराज़ में से कुछ सिक्के मिले ,
जो कुछ ख़ास लेने के लिए बचाए थे ..
कुछ ख़त मिले , कुछ मेरे नाम के ,
कुछ ऐसे जो कभी पोस्ट नहीं हुए थे ..

कुछ कतरन हैं ,
अब याद नहीं क्यों संभाली थी ..
फेकते हुए उन्हें फिर भी डर लगता है ..
सूखे ग़ुलाब दफ्न हैं डायरी में ..
कुछ यादों की जान इनमे रहती है  .

उम्र के ऐसे तामाम कतरे बिखरे हुए हैं ..
आज फिर से उसको बंद ही रखना ही ठीक समझा ..
बिखरी हुई अलमारी जिंदा तो रहती है ..
बहुत सहेजो तो कुछ यादें खो ही जाती हैं .. .