Thursday, October 4, 2012

तस्वीर


तेरे खयालो में जो तस्वीर है मेरी ..
कुछ रंग अजब हैं उसमे , तुमने ही भरे हों शायद ..
कुछ रंग गायब हों गए हैं अब.. तुमने बदले थे क्या ?
कभी मैं आइना देखता हूँ कभी ये तस्वीर तुम्हारी आँखों में ..
दो मुख्तलिफ़ सी शख्सियतें दिखती हैं..
या मेरा आइना झूठा है या ये तस्वीर पुरानी है ...

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